गुरुवार, 30 जुलाई 2009
रिज़र्वेशन .........
रिज़र्वेशन बड़ा मीठा शब्द है ...... या यु कहें अमृत है.... जिसे मिले उसके लिए अमृत और जिसे न मिले उसके लिए जहर...... यह जहर आज रास्ट्र को घुट घुट कर मरने के लिए विवश कर रहा है.... इस रिज़र्वेशन का जिम्मेदार संविधान निर्माता भीम राव आंबेडकर को माना जाता है लेकिन यह रिज़र्वेशन अंग्रेजो की देन है ... १९०९ में मुस्लिमो को निर्वाचन में अलग से स्थान देने की बात भी रिज़र्वेशन की बात है .... १९१९ सिक्खों को भारत एक्ट में दिया ...१७ अगस्त १९३२ को दलितों को आखिर एक एक करके हर वर्ग को रिज़र्वेशन देने की यह मुहीम अंग्रेजो ने क्यों चालाई इसका सीधा अर्थ यह है भारतीय समाज को बाटना .....और एक हद तक वह इसमे सफल भी हुए...संविधान निर्माता आंबेडकर ने jaldbaaji कहें या आजादी की खुशी ..... अंग्रेजो की इस भावना को नही समझ पाये..........अंग्रेजो ने हमारे लिए जो सोची समझी साजिस के तहत किया वह हमने गलती के तौर पर किया .............दलितों को या जिस वर्ग को पिचादा कहा जाता है उसको आगे बढाने का मध्यम रिज़र्वेशन ही नही है क्युकी रिज़र्वेशन जाती के आधार पर है न की आर्थिक आधार पर ........आज की रिपोर्ट बताती है कई ब्रह्मण गरीबी के चलते बच्चो को नही पड़ा पा रहे है या अपना जीवन यापन नही कर पारहे है ....रिज़र्वेशन आर्थिक आधार पर होने की जरुरत है इसके लिए समय समय पर आवाजे भी उठाई गई परन्तु पार्टियों ने यह कहकर की किसी जाती में आर्थिक तौर पर मजबूत कौन है यह कैसे पता लागाया जाए इसका कोई पैमाना नही है ... इसके लिए हर १० वर्ष के बाद जन्गड़ना के साथ जातीय आधार पर ज्न्गड़ना होनी चाहिए..... क्युकी रिज़र्वेशन में आज एक नया सब्द क्रीमी लेयर जुदा है... जिसका अर्थ है मलाईदार परत ॥ इसके विसलेसन मैं नही जाना चाहूँगा पर इसके ऊपर नीचे कौन आते है यह जाने का विषय है ....
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